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पटना में पोस्टर वार तेज: राजद ने भाजपा को ‘अजगर’ बताकर साधा निशाना, नीतीश के राज्यसभा जाने को लेकर उठे सवाल

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पटना। बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी और पोस्टर वार का सिलसिला एक बार फिर तेज हो गया है। राजधानी पटना में शनिवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश कार्यालय के बाहर लगाए गए एक पोस्टर ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। इस पोस्टर के माध्यम से राजद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पोस्टर में भाजपा को ‘अजगर’ के रूप में दर्शाया गया है और यह संकेत देने की कोशिश की गई है कि भाजपा अपने सहयोगी दलों को धीरे-धीरे कमजोर कर समाप्त करने की रणनीति अपनाती है।
दरअसल हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर बिहार की राजनीति में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजद ने पोस्टर के जरिए सत्तारूढ़ गठबंधन पर तंज कसा है। राजद कार्यालय के बाहर लगाए गए इस पोस्टर में एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर दिखाई गई है, जबकि दूसरी ओर एक विशाल अजगर सांप का चित्र बनाया गया है। इस प्रतीकात्मक चित्र के माध्यम से भाजपा को अजगर के रूप में दर्शाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भाजपा अपने सहयोगी दलों को धीरे-धीरे निगलने का काम करती है।
पोस्टर में एक नारा भी लिखा गया है—“कोई ऐसा सगा नहीं, जिसको भाजपा ने ठगा नहीं।” इस वाक्य के जरिए राजद ने भाजपा पर यह आरोप लगाने का प्रयास किया है कि पार्टी देश के अलग-अलग राज्यों में अपने सहयोगी दलों को कमजोर कर सत्ता पर कब्जा करने की रणनीति अपनाती रही है। पोस्टर में यह भी संकेत दिया गया है कि जिस प्रकार महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक समीकरण बदले थे, उसी तरह का घटनाक्रम बिहार में भी देखने को मिल सकता है।
राजद नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा के बाद से बिहार में राजनीतिक समीकरण को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में सत्ता का संतुलन बदलने की कोशिश की जा रही है और यह जनादेश की भावना के खिलाफ है।
राजद के प्रदेश महासचिव भाई अरुण ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में जो राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा है, उसे जनता ध्यान से देख रही है। उनका कहना है कि जिस तरह मुख्यमंत्री को राज्यसभा भेजने की बात सामने आई है और भाजपा के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा चल रही है, वह लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि अगर किसी दल को लगता है कि जनता उसके साथ है, तो उसे सीधे जनता के बीच जाकर चुनाव का सामना करना चाहिए। किसी सहयोगी दल के साथ राजनीतिक चालें चलकर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करना उचित नहीं है। राजद नेता ने यह भी कहा कि पोस्टर के माध्यम से उनकी पार्टी जनता के सामने भाजपा की राजनीति को उजागर करने का प्रयास कर रही है।
बिहार की राजनीति में पोस्टर वार कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी अलग-अलग मुद्दों पर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हमला करने के लिए पोस्टर और बैनर का सहारा लेते रहे हैं। खासकर पटना में राजनीतिक दलों के कार्यालयों के बाहर लगाए जाने वाले पोस्टर अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं और कई बार इनसे राजनीतिक विवाद भी खड़े हो जाते हैं।
फिलहाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जारी हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। साथ ही यह भी चर्चा चल रही है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
इसी बीच मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में उन्हें सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि इन तमाम चर्चाओं के बीच अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
कुल मिलाकर राजद द्वारा लगाए गए इस पोस्टर ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पोस्टर के जरिए भाजपा और जदयू के रिश्तों को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की गई है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पोस्टर वार का राजनीतिक असर किस रूप में सामने आता है और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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